दिन के करीब 12:30 का वक्त था लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित एक नामी रेस्टोरेंट के बाहर एक लड़का उम्र करीब 22 साल धूप में पसीने से तरबतर खड़ा था पीले रंग की जैकेट सिर पर हेलमेट और पीठ पर भारी बैग मोबाइल हाथ में था और आंखों में हल्की बेचैनी उसका नाम था राहुल वर्मा एक डिलीवरी बॉय राहुल पिछले 20 मिनट से रेस्टोरेंट के बाहर खड़ा इंतजार कर रहा था ऑर्डर तैयार नहीं हो रहा था लेकिन ऐप पर टाइम निकलता जा रहा था अंदर जाकर पूछने पर रिसेप्शन पर बैठा लड़का बार-बार यही कहता अभी बना नहीं है भाई इंतजार करो राहुल का मन बेचैन था वह जानता था कि ग्राहक गुस्सा
होगा रेटिंग खराब करेगा और कंपनी उसकी पेमेंट काट लेगी वैसे ही इस महंगाई में पेट्रोल के दाम बढ़े हुए हैं ऊपर से देर होने पर पैसे कट जाते हैं काफी देर बाद ऑर्डर हाथ में आया राहुल ने झटपट बाइक उठाई और निकल पड़ा वह ग्राहक का घर जानता नहीं था इसलिए ग मैप देख देखकर रास्ता पकड़ता जा रहा था और डर एक पॉश सोसाइटी में जाना था वहां के गार्ड से बात करने पर वह धीरे-धीरे ऊपर अपार्टमेंट तक पहुंचा घंटी बजाई दरवाजा खुला दरवाजे पर खड़ा था एक तेज रार ऊंचे ओहदे का आदमी नाम था विवेक शुक्ला जो एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था बाल करीने से सजे थे महंगे
कपड़े पहने थे और हाथ में एप्पल वॉच थी विवेक गुस्से में तुम लोग टाइम से क्यों नहीं आते यह कोई सर्विस है आधा घंटा लेट हो और ऊपर से घंटी पर घंटी राहुल ने शांति से कहा सर ऑर्डर तैयार होने में ही देरी हुई थी मैंने तो बहुत जल्दी पहुंचा दिया विवेक बहाने मत बना तुम लोगों को सिर्फ पैसे चाहिए सर्विस कैसी भी दो हटो यहां से इतना कहकर उसने राहुल के हाथ से खाना छीना और उसे कंधे से धक्का दे दिया राहुल पीछे लड़खड़ा करर गिरते-गिरते बचा हेलमेट एक तरफ गिर गया और उसकी बाइक वहीं किनारे खड़ी थी दो-तीन लोग बालकनी से सब देख रहे थे पर किसी ने कुछ नहीं कहा विवेक दरवाजा
बंद कर चुका था राहुल ने झुके हुए कंधों से अपना हेलमेट उठाया और बिना कुछ बोले सीढ़ियां उतरने लगा उसकी आंखों में आंसू नहीं थे पर अंदर एक चुबन जरूर थी थी उसके मन में कुछ टूट गया था शायद आत्मसम्मान का एक टुकड़ा वह नीचे अपनी बाइक पर बैठा और कुछ देर चुपचाप वहीं रुका रहा फोन पर रेटिंग देखी एक स्टार क्या इतना छोटा हूं मैं उसने खुद से सवाल किया लेकिन फिर उसने अपनी मां की तस्वीर देखी जो मोबाइल के लॉक स्क्रीन पर थी मां जो कैंसर की मरीज थी और जिनकी दवाइयों के लिए वह दिन रात काम करता था राहुल ने गहरी सांस ली हेलमेट पहना और
अगले ऑर्डर की ओर बढ़ गया उसी दिन रात को सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज एक गार्ड ने [संगीत] youtube3 का वक्त था लखनऊ के एक लोकल न्यूज़ चैनल पर एक हेडलाइन तेजी से वायरल हो रही थी डिलीवरी बॉय को धक्का देने वाला वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर गुस्सा वीडियो में साफ दिख रहा था कि एक बड़ी सोसाइटी के फ्लैट के बाहर एक युवक डिलीवरी बैग लिए खड़ा है और ग्राहक बिना कुछ सुने उसे कंधे से धक्का देकर अंदर चला जाता है लोगों ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा यह हमारे देश के असली हीरो है इन्हें अपमान नहीं सम्मान मिलना चाहिए बिना हेलमेट गिरा
दिया भगवान का शुक्र है चोट नहीं लगी इंसानियत बची ही कहां है कुछ ही घंटों में वीडियो वायरल हो गया डायरेक्टर ने कहा हम एक ऐसे समाज में काम कर रहे हैं जहां हर इंसान के साथ सम्मान से पेश आना हमारी जिम्मेदारी है तुमने एक मासूम मेहनती लड़के के साथ जो किया वह हमारी कंपनी की छवि पर सीधा हमला है विवेक अब भी हेकड़ी में था एक मामूली डिलीवरी बॉय की वजह से मेरी नौकरी जाएगी लोग बहुत ओवर रिएक्ट कर रहे हैं लेकिन इस बार जवाब तेज था मामूली इंसान नहीं वही है जो हमारी
जिंदगी चलाते हैं हम आराम से बैठकर खाना खाते हैं क्योंकि वह धूप बारिश ट्रैफिक में लड़ते हैं उसी शाम को कंपनी ने विवेक को सस्पेंड कर दिया और एक आधिकारिक माफी जारी की लेकिन बात यही नहीं रुकी राहुल जिसे उस वक्त तक यह सब खबर नहीं थी शाम को ऑनर डिलीवर करते वक्त एक ग्राहक के मुंह से सुना भाई तुम वही हो ना जो वायरल हो गए राहुल हक्का बक्का रह गया क्या मतलब क्या हुआ ग्राहक ने वीडियो दिखाया राहुल का चेहरा सन्न रह गया कुछ पल के लिए उसकी आंखें भर आई वह सिर्फ अपना काम कर रहा था ना कैमरे के लिए ना पब्लिसिटी के लिए बस मां की दवाइयों और घर का खर्च चलाने के
लिए उसी रात एक एनजीओ ने राहुल से संपर्क किया हम आपके लिए कुछ करना चाहते हैं भाई आपका हौसला टूटने नहीं देना चाहिए राहुल ने विनम्रता से कहा मैंने कुछ खास नहीं किया बस अपमान सा क्योंकि मुझे लगा उससे भी बड़ी जिम्मेदारी मेरे कंधे पर है लेकिन अगले दिन सुबह जो हुआ उसने राहुल को भी अंदर से झख दिया सोशल मीडिया पर राहुल को साइलेंट हीरो का नाम दिया गया लोगों ने उसके लिए फंडरेजिंग शुरू कर दी राहुल के लिए नई बाइक राहुल की मां के इलाज के लिए सहयोग राहुल की कहानी अब सिर्फ एक घटना नहीं रही वह एक संदेश बन गई थी वहीं विवेक अब अपने फ्लैट में ला था
ऑफिस से निकाल दिया गया पड़ोसियों की बातें झेलनी पड़ रही थी और मीडिया रोज दरवाजे पर थी एक गलती ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी उसने खुद से कहा पर जवाब अंदर से आया गलती नहीं अहंकार अब लखनऊ ही नहीं पूरे देश में लोग राहुल के बारे में जान चुके थे सुबह-सुबह टीवी चैनलों पर उसकी तस्वीरें आ रही थी पीठ पर डिलीवरी बैग माथे पर पसीना और चेहरा बिल्कुल शांत यह लड़का आज की पीढ़ी के लिए एक मिसाल है एक एंकर ने लाइव शो में कहा राहुल अब भी वही था वही बाइक वही पसीना वही वक्त पर खाना पहुंचाने की जद्दोजहद फर्क सिर्फ इतना था कि अब जो लोग
उसे देखते उनके चेहरे पर सम्मान होता उस दिन की बात है राहुल एक सोसाइटी में ऑर्डर लेकर पहुंचा एक बुजुर्ग गार्ड ने गेट खोला और कहा बेटा आप अंदर जाइए सब आपका इंतजार कर रहे हैं राहुल थोड़ा चौका मेरा इंतजार किस लिए जैसे ही वह लिफ्ट से ऊपर पहुंचा फ्लैट का दरवाजा खुला सामने वही एनजीओ की टीम खड़ी थी जिनसे वह पहले मिला था साथ में एक डॉक्टर और एक नया बाइक स्टोर का कर्मचारी हमने आपकी मां के इलाज के लिए प्राइवेट हॉस्पिटल में बेड बुक करवा दिया है और यह रही आपकी नई बाइक की चाबी राहुल की आंखें नम हो गई पर मैं यह सब क्यों ले रहा हूं मैंने तो कुछ किया ही
नहीं एनजीओ के हेड ने मुस्कुरा कर कहा तुमने चुप रहकर बहुत कुछ कह दिया आज जब लोग सोशल मीडिया पर गालियां देकर अपनी बात मनवा हैं तुमने अपमान सहकर भी इंसानियत नहीं छोड़ी यही बड़ा काम होता है राहुल वहीं दूसरी ओर विवेक के लिए हालात बद से बदतर होते जा रहे थे सोसाइटी के लोग उससे कटने लगे थे बच्चे उसकी ओर देखकर फुसफुसाना नफरत से भर जाती एक दिन उसने भी सोशल मीडिया खोलकर देखा एक वीडियो में राहुल की मां अस्पताल के बिस्तर पर थी और कह रही थी मेरा बेटा दुनिया के लिए डिलीवरी बॉय होगा मेरे लिए तो भगवान का भेजा हुआ फरिश्ता है यह सुनते
ही विवेक की आंखों में आंसू आ गए मैं किस तरह का इंसान बन गया हूं उसने खुद से कहा उसी शाम वह एक इंटरव्यू देने वाले पत्रकार के पास गया और विनम्रता से कहा मुझे अपनी गलती सार्वजनिक रूप से स्वीकार करनी है मैं राहुल से माफी मांगना चाहता हूं अगले दिन की सुर्खियां बदल चुकी थी विवेक शुक्ला ने डिलीवरी बॉय से मांगी माफी कहा मैं शर्मिंदा हूं पत्रकार ने राहुल से संपर्क किया और पूछा क्या आप विवेक जी से मिलेंगे राहुल कुछ देर चुप रहा फिर बोला अगर व सच में शर्मिंदा है तो हां पर मैं किसी से बदला नहीं लेना चाहता दोनों की मुलाकात एक पार्क में हुई मीडिया दूर थी
सिर्फ एक कैमरा दूर से तस्वीरें ले रहा था विवेक ने पास आकर राहुल के पैर छूने चाहे लेकिन राहुल ने तुरंत उसे रोका और हाथ जोड़ ली सर आप बड़े हैं गलती इंसान से होती है पर सीख वही इंसान की निशानी होती है विवेक की आंखें भर आई तुमने मुझे बहुत बड़ा सबक सिखाया राहुल राहुल ने मुस्कुरा कर कहा मेरी मां कहती है बेटा जितना नीचे जाएगा तना ऊंचा उठेगा शायद मैं उसी राह पर चल रहा हूं उस एक मुलाकात ने दोनों को बदल दिया विवेक को अहंकार से और राहुल को आत्मसम्मान से भर दिया कुछ कहानियां सिर्फ दिल को छूती नहीं वह जिंदगी की दिशा बदल
देती है राहुल की कहानी भी ऐसी ही बन चुकी थी अब राहुल सिर्फ एक डिलीवरी बॉय नहीं रहा था वह हर उस इंसान का प्रतीक बन गया था जो मेहनत करता है अपमान सहता है लेकिन फिर भी मुस्कुराता है झुकता नहीं उसकी एक चुप्पी उसके पूरे जीवन का सबसे बुलंद जवाब बन गई थी उस दिन से कुछ हफ्ते बीत चुके थे राहुल की मां का इलाज अब एक प्राइवेट कैंसर संस्थान में चल रहा था जहां के डॉक्टरों ने कहा अब वह खतरे से बाहर है और यह आपके बेटे की वजह से मुमकिन हुआ है मां ने राहुल का माथा चूमा और कहा मैंने तुझे हीरा बनाया लेकिन तेरा दर्द किसी ने देखा समझा यह तो भगवान की
मर्जी थी राहुल अब भी डिलीवरी कर रहा था लेकिन अब बाइक नहीं थी रास्ते आसान थे और चेहरे पर अजनबियों की मुस्कान मिलती थी लोग रास्ता देते गार्ड सलाम करते और ग्राहक कहते भाई हमें गर्व है तुम पर एक दिन उसे जोमाटो की ओर से फोन आया हम आपको कंपनी का ब्रांड एंबेसडर बनाना चाहते हैं एक वीडियो कैंपेन के लिए राहुल को पहले तो यकीन ही नहीं हुआ कैमरे लाइट इंटरव्यू यह सब उसके जीवन से बहुत दूर की चीजें थी लेकिन अब वह सिर्फ डिलीवरी नहीं कर रहा था वह लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका था
News
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इतने सालों तक तुम्हें पालने के बाद, अब समय आ गया है कि तुम अपनी माँ की मेहरबानी का बदला चुकाओ!/hi
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अपनी पत्नी को छोड़कर डायरेक्टर की बेटी से शादी करने की खुशी में मैं बहुत खुश था, लेकिन शादी की रात जब उसने अपनी ड्रेस उठाई तो मैं हैरान रह गया।/hi
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मेरे बेटे ने गांव वाला अपना घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में एक घर खरीदा। लेकिन फिर वह अपनी पत्नी के माता-पिता को अपने साथ रहने के लिए ले आया, जबकि वे मेरी पत्नी और मेरे साथ, जो गांव में रहते थे, ऐसा बर्ताव करते थे जैसे हमारा कोई वजूद ही न हो। गुस्से में, मैं बिना बताए डिनर के समय उनसे मिलने चला गया। मेरे बेटे ने जवाब दिया, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम आ रही हो?” और उसके बाद मेरी बहू ने जो किया, उससे मैं हैरान रह गया।/hi
मेरे बेटे ने गांव में हमारा घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में…
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