लड़के को साधारण समझ। एक करोड़पति बाप की बेटी ने शादी से की इंकार। लेकिन जब लड़का का असली चेहरा सामने आया तो उसके उड़ गए होश। वो लड़की जिसे लगता था कि दिखावा ही सब कुछ है। उसने एक सादे लड़के को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि वो अमीर नजर नहीं आता था। लेकिन जब सच सामने आया तो उसे एहसास हुआ कि वह सोच नहीं। अपनी किस्मत को ठुकरा चुकी थी। यह सिर्फ कहानी नहीं एक सीख है जो शायद आपको भी खुद से सवाल करने पर मजबूर कर दे। तो पूरी कहानी जानने के लिए वीडियो को आखिर तक जरूर देखें। साथ ही दिल से एक लाइक करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और कमेंट में अपना और
अपने शहर का नाम जरूर लिखें। दोस्तों, यह सच्ची कहानी गुजरात प्रदेश के सूरत शहर की है। जहां सुबह-सुबह एक बड़े बंगलों के अंदर नैना नाम की एक लड़की जो देखने में जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही अमीर भी अपनी नींद से जाग रही थी। नैना की दुनिया में कभी कुछ कमी नहीं थी। ना प्यार की, ना पैसे की, ना दिखावे की। लेकिन आज सुबह कुछ अलग थी। दरवाजा खटके बिना खुला और उसके पापा शेखर रावत कमरे में दाखिल हुए। चेहरे पर हल्का तनाव पर आंखों में उम्मीद की चमक थी। नैना बेटा जल्दी तैयार हो जा। एक खास जगह जाना है। नैना ने आंखें मलते हुए पूछा। इतनी सुबह कहां पापा? उन्होंने
मुस्कुराकर कहा एक रिश्ता आया है। लड़का करोड़ती है। आज अगर सब ठीक रहा तो तुम्हारी जिंदगी किसी सपने से कम नहीं होगी। नैना चुप रही। कुछ पल सोचा। फिर अपने पापा की उम्मीद भरी आंखों को देखा और बिना और कुछ कहे सिर हिला दिया। ठीक है पापा आप गाड़ी निकालो। मैं तैयार होकर आती हूं। थोड़ी ही देर में नैना तैयार होकर नीचे आई। हल्का मेकअप, महंगे कपड़े। लेकिन चेहरे पर एक उलझन थी जो शायद खुद उसे भी समझ नहीं आ रही थी। पापा ने उसे देखा और मुस्कुरा कर बोले मेरी बेटी तो आज परी लग रही है। कौन मना कर सकता है तुझसे रिश्ता करने से? नैना ने हल्की सी मुस्कान दी
लेकिन उसकी आंखों में कहीं एक बेचैनी तैर रही थी। गाड़ी फाइव स्टार होटल के दरवाजे पर रुकी। हॉल पहले से सजा हुआ था। महकते फूल, सुनहरी रोशनी और एक अजीब सा रोमांच हवा में घुला हुआ। पापा के साथ नैना एक टेबल पर बैठी थी। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और एक साधारण सा लड़का अपने माता-पिता के साथ अंदर आया। नैना की नजर जैसे ही उस लड़के पर पड़ी उसकी आंखें चौड़ी हो गई। चेहरे पर एक झटका साफ दिखा और वो बेसाख्ता बोल पड़ी। तुम तुम यहां क्या कर रहे हो? वो लड़का और कोई नहीं। वही आरव था जो उसके साथ कॉलेज में पढ़ता था। सादा कपड़ा, पुरानी किताबें, बिना
फोन, बिना स्टाइल और जिसे कभी नैना ने घमंड में फटीचर तक कह दिया था। वो फौरन पापा की ओर मुड़ी। पापा यह तो हमारे कॉलेज का लड़का है। यह गरीब है और आप मुझे इससे मिलाने लाए हैं। पापा खुद भी चौंक गए। धीरे बोले, शायद यह लड़का नहीं, कोई स्टाफ होगा। असली लड़का अभी आएगा। लेकिन तभी उस लड़के ने आगे बढ़कर मुस्कुरा कर कहा, नमस्ते अंकल, मैं ही आरव हूं जिससे आप नैना की शादी की बात करने आए हैं। एक पल को जैसे वक्त रुक गया। नैना को जैसे यकीन ही नहीं हुआ। उसकी आंखों में गुस्सा था और आवाज में वो तेजी जो हमेशा उसके घमंड का हिस्सा रही थी। पापा, यह
लड़का करोड़पति कैसे हो सकता है? यह तो फोन तक नहीं रखता था। इसके पास तो पहनने को भी ठीक कपड़े नहीं होते थे। यह हमें धोखा दे रहे हैं। उसके पापा कुछ कह पाते। इससे पहले आरव की मां ने धीमे स्वर में कहा, बेटी बात सुन लो पूरी। हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती। और हर सादा दिखने वाला इंसान गरीब नहीं होता। लेकिन नैना सुनने के मूड में नहीं थी। उसकी बातों में वही पुराना घमंड झलक रहा था। फिर आरव ने पहली बार बिना मुस्कुराए एक शांत स्वर में कहा। नैना तुम्हारा नजरिया अब भी नहीं बदला लेकिन मैं अब वो इंसान नहीं हूं जिसे तुम्हारी बातों से फर्क पड़ता है और सच
कहूं तो अब मुझे यह रिश्ता नहीं चाहिए। सारा हॉल एकदम शांत हो गया। नैना की आंखें फटी रह गई। वो जो हमेशा सोचती थी कि उसे कोई मना नहीं कर सकता। आज वही लड़का जो कभी उसके मजाक का हिस्सा था। आज उसे ठुकरा कर चला गया। आरव ने सिर झुकाया। अपने माता-पिता की ओर देखा और कहा चलिए मामबा पूछी अब यहां रुकने का कोई मतलब नहीं और वह सब वहां से निकल गए नैना वही खड़ी रही जैसे किसी ने जमीन खींच ली हो उसके पैरों से होटल के उस सजे संवरे हॉल से निकलकर जब नैना घर लौटी तो उसके चेहरे की चमक कहीं खो चुकी थी उसकी आंखें अब भी उसी पल में अटकी थी जब आरव ने बिना गुस्से बिना दाने
बस शांत होकर उसे ठुकरा करा दिया था। रात भर वो सो नहीं पाई। कभी कॉलेज के वो दिन याद आते जब वो आरव पर हंसती थी। कभी उसकी वो किताबों में डूबी आंखें और अब उसकी मां की आवाज हर सादा दिखने वाला इंसान गरीब नहीं होता। सुबह जैसे ही हुई नैना ने कुछ ऐसा किया जो उसने कभी नहीं किया था। उसने अपनी वार्ड्रोब खोली। महंगे कपड़े एक तरफ किए और एक सादा सूट निकाला। गाड़ी की चाबी दराज में रख दी और पहली बार बिना मेकअप बिना घड़ी वह सीधा एक ऑटो में बैठकर कॉलेज के लिए निकल गई। कॉलेज पहुंचते ही सब चौंक गए। अरे नैना तू ऑटो से कपड़े यह तो
ब्रांडेड भी नहीं है। लेकिन नैना सिर्फ मुस्कुराई। उसके चेहरे पर अब वो घमंड वाली मुस्कान नहीं थी। बल्कि एक शांति थी जिसे कोई माप नहीं सकता। लाइब्रेरी में जब उसकी नजर दूर बैठे आरव पर पड़ी तो वह पहली बार चुपचाप उसके पास जाकर बैठ गई। आरव ने एक बार उसकी तरफ देखा और फिर किताब की ओर लौट गया। नैना ने धीमे से कहा, आरव, आज मैं माफी मांगना चाहती हूं। आरव ने किताब बंद की। उसकी आंखों में हल्का सा सवाल था। माफी क्यों? नैना की आवाज धीमी थी। लेकिन उसमें वजन था। क्योंकि मैं तुमसे वह सबका गई जो खुद मुझे नहीं कहना चाहिए था। क्योंकि मैंने तुम्हें उस नजर से देखा जो
इंसान को उसके कपड़ों से जज करती है। उसके मन से नहीं। आरव चुप रहा पर उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान लौट आई। लाइब्रेरी की उस टेबल पर दो लोग बैठे थे। जो कभी एक दूसरे से नजरें चुराते थे। आज एक दूसरे की आंखों में झांक रहे थे। लेकिन इस बार बात माफी की नहीं थी। अब बात उस सच्चाई की थी जिसे आरव अब तक छुपाए बैठा था। नैना ने हल्की सी हीचक के साथ पूछा। आरव एक बात पूछूं? उस दिन मेरे पापा ने कहा था कि तुम्हें बहुत अर्जेंट में शादी करनी है। पर क्यों? आरव चुप हो गया। उसकी आंखें कुछ पल के लिए नीचे झुक गई। शव जैसे गले में अटक गए हो।
लेकिन फिर उसने गहरी सांस ली और सच को शब्दों का सहारा दे दिया। नैना मेरी मां को लास्ट स्टेज का कैंसर है। डॉक्टर्स ने कह दिया है कि अब उनके पास ज्यादा समय नहीं है। उनकी एक ही आखिरी ख्वाहिश थी कि वो मेरी शादी होते हुए देख सकें। अपनी बहू को घर में आते हुए देख सकें और तभी वह आंखें बंद करें। सुकून से इतना कहते ही आरव की आवाज भरने लगी। उसने नजरें फेर ली। जैसे खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहता था। नैना का दिल जैसे एक पल के लिए धड़कना भूल गया। वह कुछ बोल नहीं पाई। बस उसकी आंखों से दो बूंद आंसू बह निकले। उसके सामने बैठा वो लड़का जिसे वह कभी कमजोर समझती
थी। आज इतनी बड़ी मजबूती से एक टूटती हुई सच्चाई को जी रहा था। आरव ने खुद को संभालते हुए कहा। मैं शादी इसलिए करना चाहता था क्योंकि मैं मां से यह वादा नहीं तोड़ सकता था। उनकी आंखों में वह सपना था जो अगर अधूरा रह जाता तो मैं सारी उम्र खुद को माफ नहीं कर पाता। नैना ने अब पहली बार उसके हाथ पर अपना हाथ रखा। उसके हंठ कांप रहे थे। पर आवाज एकदम साफ थी। तुम अकेले नहीं हो। आरव, अब नहीं। उस शाम कॉलेज की कैंटीन की पिछड़ी बेंच पर हल्की हवा चल रही थी। लेकिन नैना के दिल में तूफान था। आरव के सामने बैठी वह अब वही लड़की नहीं थी जो किसी से कुछ पाने के लिए
जुड़ती थी। अब वह खुद से किसी को देने के लिए तैयार हो चुकी थी। कुछ पल की चुप्पी के बाद उसने धीरे से कहा आरव अगर मैं कहूं कि मैं तुम्हारी मां की आखिरी ख्वाहिश पूरी करना चाहती हूं। तो क्या तुम मुझे अपना बनने दोगे? आरव चौंक कर उसकी तरफ देखता है। क्या तुम जानते हो? यह फैसला सिर्फ भावना से नहीं हिम्मत से लेना होता है। नैना की आंखों में अब कोई हिचक नहीं थी। मुझे पता है यह कोई फिल्मी कहानी नहीं है। मैं जानती हूं कि तुम्हारी जिंदगी आसान नहीं है। पर मैं अब दिखावे वाली लड़की नहीं हूं। आरव मैं तुम्हारे साथ तुम्हारी मां के सामने खड़ी होना चाहती
हूं। एक बहू की तरह नहीं एक बेटी की तरह आरव की आंखें भर आई। उसने पहली बार बिना बोले सिर हिलाया और पहली बार उसकी हथेलियों ने नैना का हाथ पूरी तरह थामा जैसे किसी ने बोझ साझा कर लिया हो। उसी रात दोनों ने अपनेपने घर पर सारी बातें साफ-साफ रख दी। शेखर रावत ने जब बेटी की आंखों में वो नरमी वो दृढ़ता देखी। तो उन्होंने कहा, “अगर यह तुम्हारा फैसला है, तो मैं बस तुम्हारी छाप बनूंगा।” और आरव की मां जब नैना को सामने खड़ी देखती है तो उनकी आंखों से आंसू बहते हैं। लेकिन वह आंसू दर्द के नहीं तसल्ली के होते हैं। सब कुछ बहुत जल्दी तय हो गया। किसी बड़े
आयोजन की जरूरत नहीं थी। ना शोर शराबे की तमन्ना। सिर्फ एक सादा सच्चा और सम्मान से भरा वक्त चाहिए था। जिसमें एक मां अपने बेटे की शादी अपनी आंखों से देख सके। शादी की तारीख करीब थी। नैना ने खुद कहा मैं दुल्हन बनूंगी लेकिन बिना किसी घूंघट, भारी गहनों या ब्रांडेड लिबास के। क्योंकि इस रिश्ते में मेरा श्रृंगार मेरा मन है और मेरी सबसे बड़ी पहचान तुम्हारी मां की मुस्कान। शादी के दिन आरव की मां को स्ट्रेचर पर अस्पताल से घर लाया गया। डॉक्टर्स की एक टीम पास में थी। लेकिन मां की आंखें सिर्फ एक दरवाजे की तरफ देख रही थी। जहां से उनकी होने वाली बहू नैना
दुल्हन बनकर आने वाली थी। नैना जैसे ही लाल साड़ी में बिना बनाव टिपन के हाथ में आरती की थाली लेकर उनके सामने आई आरव की मां की आंखें भर आई। उन्होंने कांपते हाथों से नैना का चेहरा छुआ और मुस्कुरा कर बोली अब मैं सुकून से जा सकती हूं। तू आ गई बेटी विवाह की हर रस्म सादगी से हुई लेकिन हर पल भारी था भावनाओं से आंसुओं से और संतोष से जब आरव ने सिंदूर उठाकर नैना की मांग में भरा तो उसकी मां की आंखों से दो बूंद आंसू गिरे और उन आंसुओं के साथ ही उनके होठों पर एक आखिरी मुस्कान आकर टिक गई। शादी पूरी होते ही मां की आंखें धीरे
से बंद हो गई। उनका हाथ अब भी नैना के हाथ में था और वह चली गई अपने बेटे और बहू को एक साथ देखकर। शायद इस भरोसे के साथ कि उनका आरव अब अकेला नहीं है। आरव की मां अब नहीं थी। लेकिन उनके जाने के बाद जो कुछ पीछे रह गया वो था आशीर्वाद, समझदारी और एक ऐसा रिश्ता जो सिर्फ दो लोगों के बीच नहीं दो सोचों के बीच जुड़ा था। शादी के बाद नैना और आरव ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। फिर साथ मिलकर बिजनेस संभालना शुरू किया। अब भी कार थी, बंगला था, पैसे थे। लेकिन अब घमंड नहीं था। दिखावा नहीं था। थी तो बस एक सादगी जिसमें आत्मसम्मान की खुशबू थी। नैना अब लोगों के सामने उस तरह
नहीं आती थी जैसे पहले आती थी। अब उसकी मौजूदगी शोर नहीं करती थी। पर उसकी बातें असर छोड़ती थी। कभी जो कॉलेज में लड़कियां उसके कपड़ों, मेकअप या कार की वजह से दोस्त बनती थी। अब वही लड़कियां उसकी सोच, उसकी सादगी और उसकी समझ से प्रभावित होती थी। और आरव वो अब भी वही था। शांत, गहरा और मजबूत। लेकिन अब उसकी ताकत दोगुनी हो गई थी। क्योंकि अब उसके साथ नैना थी। और फिर एक दिन कॉलेज के एक पुराने दोस्त ने मजाक में कहा अगर आरव करोड़पति ना होता तो नैना क्या तब भी उससे शादी करती नैना मुस्कुराई और सिर्फ इतना कहा अगर दौलत सिर्फ पैसों में होती तो शायद मैं ना करती
लेकिन आरव तो इंसानियत का अरब ही था और मैं सौभाग्यशाली हूं कि मैंने उसे पहचाना। वक्त रहते कहानी यही खत्म होती है। पर एक सवाल हर श्रोता के दिल में रह जाता है। क्या हम भी किसी की सादगी को पहचानते हैं या आज भी उसे नजरअंदाज कर देते हैं? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह अमीर दिखता नहीं। सोचिए क्योंकि हो सकता है आप जिस इंसान को नजरअंदाज कर रहे हैं, वह किसी दिन आपकी सोच को हमेशा के लिए बदल दे। अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो। तो कमेंट में सिर्फ इतना बताइए। क्या आपने कभी किसी को सिर्फ उसके पहनावे या हालत से जज किया है और क्या आप चाहेंगे कि कोई आपको भी यूं ही जज
करे बिना आपकी सच्चाई जाने कमेंट करके जरूर बताएं और अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो तो वीडियो को लाइक करें। दोस्तों शब्दों से सीखें और जिंदगी में अपनाएं। मिलते हैं अगली वीडियो में नई कहानी के साथ। तब तक के लिए जय हिंद जय
News
न्यू दिल्ली टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का एक्सेप्टेंस लेटर हाथ में लिए, मैं रो पड़ी क्योंकि मेरी फॉस्टर मां ने मुझे स्कूल छुड़वाकर गांव के 60 साल के मिस्टर शर्मा से शादी करने पर मजबूर किया, ताकि मेरे छोटे भाई को मेरठ में मेडिकल स्कूल में पढ़ने के लिए दहेज के पैसे मिल सकें। मेरी शादी के दिन, पूरे गांव ने मुझ पर उंगली उठाई और गॉसिप की, तरह-तरह की बुरी बातें कहीं। मेरी शादी की रात, मेरे पति अंदर आए और बिस्तर पर दो चीजें रख दीं जिससे मैं चुपचाप रो पड़ी…
जिस दिन मुझे एक्सेप्टेंस लेटर मिला, मैं रोई नहीं। मैं बस घर के पीछे कुएं के पास काफी देर तक…
इतने सालों तक तुम्हें पालने के बाद, अब समय आ गया है कि तुम अपनी माँ की मेहरबानी का बदला चुकाओ!/hi
न्यू दिल्ली टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का एक्सेप्टेंस लेटर हाथ में लिए, मैं रो पड़ी क्योंकि मेरी फॉस्टर मां ने मुझे…
अपनी पत्नी को छोड़कर डायरेक्टर की बेटी से शादी करने की खुशी में मैं बहुत खुश था, लेकिन शादी की रात जब उसने अपनी ड्रेस उठाई तो मैं हैरान रह गया।/hi
अपनी पत्नी को छोड़कर डायरेक्टर की बेटी से शादी करने की खुशी में, मैं अपनी शादी की रात हैरान रह…
कंपनी में एक खूबसूरत शादीशुदा औरत को पटाने पर गर्व करते हुए, मैं आज सुबह उठा और जब मैंने अपनी तरफ देखा तो हैरान रह गया।/hi
काम की जगह पर एक खूबसूरत शादीशुदा औरत को जीतने पर गर्व महसूस करते हुए, मैं एक सुबह उठा और…
आधी रात को, मेरी हॉट पड़ोसन मेरे दरवाज़े पर दस्तक देकर अंदर आने के लिए कहने लगी, और जब मुझे उसकी हरकतों के पीछे का असली मकसद पता चला तो मैं हैरान रह गई…/hi
आधी रात को, मेरी हॉट पड़ोसन ने अंदर आने के लिए मेरा दरवाज़ा खटखटाया, और जब मुझे उसकी हरकतों के…
मेरे बेटे ने गांव वाला अपना घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में एक घर खरीदा। लेकिन फिर वह अपनी पत्नी के माता-पिता को अपने साथ रहने के लिए ले आया, जबकि वे मेरी पत्नी और मेरे साथ, जो गांव में रहते थे, ऐसा बर्ताव करते थे जैसे हमारा कोई वजूद ही न हो। गुस्से में, मैं बिना बताए डिनर के समय उनसे मिलने चला गया। मेरे बेटे ने जवाब दिया, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम आ रही हो?” और उसके बाद मेरी बहू ने जो किया, उससे मैं हैरान रह गया।/hi
मेरे बेटे ने गांव में हमारा घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में…
End of content
No more pages to load






