“मार दिया जाए। कि छोड़ दिया जाए। बोल तेरे साथ क्या सुलूक” मेरा गांव मेरा देश फिल्म का ये गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। आज भी ये गीत लोग सुनते हैं और खूब सुनते हैं। इस गीत पर नृत्य करती दिखाई देने वाली एक्ट्रेस का नाम है Laxmi Chhaya.
Laxmi Chhaya का जन्म हुआ था 7 जनवरी 1948 को बॉम्बे में। फिल्मों में Laxmi Chhaya एक इत्तेफाक से आई थी। लक्ष्मी उस वक्त महज़ नौ साल की ही थी जब एक दिन उन्हें अपने घरवालों के साथ एक फिल्म की शूटिंग देखने जाने का मौका मिला। वहां डायरेक्टर महेश कौल ने पहली दफा लक्ष्मी छाया को देखा था।
उन दिनों महेश कौल एक नई बच्ची को अपनी फिल्म के लिए तलाश रहे थे। उन्होंने जब लक्ष्मी को देखा तो लगा कि जैसे यही बच्ची उनकी फिल्म के लिए परफेक्ट रहेगी।
महेश कौल ने लक्ष्मी छाया के माता पिता से इस बारे में बात की। और यूं लक्ष्मी छाया को उनके करियर की पहली फिल्म मिली। उस फिल्म का नाम था तलाक जो साल 1958 में रिलीज़ हुई थी।
पहली फिल्म के बाद लक्ष्मी ने दूसरी फिल्म की पूरे तीन साल बाद। उस फिल्म का नाम था बड़ा आदमी। और उस फिल्म में लक्ष्मी छाया ने इतना शानदार नृत्य किया कि वो नई डांसर के तौर पर मशहूर हो गई। 
उसके बाद लक्ष्मी ने कई फिल्मों में बतौर डांसर काम किया। जैसे नॉटी बॉय, रॉयल मेल, ब्लफ मास्टर, गुमनाम, तीसरी मंज़िल व राम और श्याम।
कई फिल्मों में उस वक्त Laxmi Chhaya ने छोटे-छोटे रोल भी निभाए। मगर जब साल 1971 में फिल्म मेरा गांव मेरा देश आई तो Laxmi Chhaya को वो लोकप्रियता मिली जिसकी तलाश उन्हें बीते कई सालों से थी।
मेरा गांव मेरा देश फिल्म के बाद लक्ष्मी छाया को शोहरत तो मिल गई। लेकिन उनका एक ख्वाब भी टूटकर बिखर गया। वो ख्वाब था फिल्मों में हीरोइन बनना। मेरा गांव मेरा देश के बाद लक्ष्मी छाया पर डांसर होने व सपोर्टिंग कैरेक्टर्स निभाने वाली एक्ट्रेस का ठप्पा लग गया।

यूं तो एक-दो फिल्में थी जिनमें उन्हें बतौर मुख्य हीरोइन साइन किया गया था। उनमें से एक में तो लक्ष्मी के हीरो धर्मेंद्र के छोटे भाई अजीत देओल थे। लेकिन वो दोनों फिल्में कभी पूरी ना बन सकी। 80 का दशक आते-आते लक्ष्मी छाया को काम मिलना भी बंद हो गया।
और मजबूरी में लक्ष्मी छाया ना चाहते हुए भी फिल्मों से दूर हो गई। लगभग 80 फिल्मों में काम कर चुकी लक्ष्मी छाया ने बाद में एक डांस स्कूल खोल लिया और खुद को उसी में व्यस्त कर लिया।
लक्ष्मी छाया ने कभी शादी नहीं की थी। जब वो फिल्मी दुनिया में सक्रिय थी तब उन्होंने इसलिए शादी नहीं की कि कहीं उन्हें फिल्मों में काम मिलना बंद ना हो जाए। लेकिन जब फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें नज़रअंदाज़ करना शुरू कर दिया तो उन्होंने शादी करने का विचार भी बनाया।
मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लक्ष्मी छाया को कैंसर हो गया था। और कैंसर की वजह से लक्ष्मी छाया किसी से शादी ना कर सकी। कैंसर से लड़ते हुए ही 09 मई 2004 को लक्ष्मी छाया की मौत हो गई।
News
न्यू दिल्ली टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का एक्सेप्टेंस लेटर हाथ में लिए, मैं रो पड़ी क्योंकि मेरी फॉस्टर मां ने मुझे स्कूल छुड़वाकर गांव के 60 साल के मिस्टर शर्मा से शादी करने पर मजबूर किया, ताकि मेरे छोटे भाई को मेरठ में मेडिकल स्कूल में पढ़ने के लिए दहेज के पैसे मिल सकें। मेरी शादी के दिन, पूरे गांव ने मुझ पर उंगली उठाई और गॉसिप की, तरह-तरह की बुरी बातें कहीं। मेरी शादी की रात, मेरे पति अंदर आए और बिस्तर पर दो चीजें रख दीं जिससे मैं चुपचाप रो पड़ी…
जिस दिन मुझे एक्सेप्टेंस लेटर मिला, मैं रोई नहीं। मैं बस घर के पीछे कुएं के पास काफी देर तक…
इतने सालों तक तुम्हें पालने के बाद, अब समय आ गया है कि तुम अपनी माँ की मेहरबानी का बदला चुकाओ!/hi
न्यू दिल्ली टीचर ट्रेनिंग कॉलेज का एक्सेप्टेंस लेटर हाथ में लिए, मैं रो पड़ी क्योंकि मेरी फॉस्टर मां ने मुझे…
अपनी पत्नी को छोड़कर डायरेक्टर की बेटी से शादी करने की खुशी में मैं बहुत खुश था, लेकिन शादी की रात जब उसने अपनी ड्रेस उठाई तो मैं हैरान रह गया।/hi
अपनी पत्नी को छोड़कर डायरेक्टर की बेटी से शादी करने की खुशी में, मैं अपनी शादी की रात हैरान रह…
कंपनी में एक खूबसूरत शादीशुदा औरत को पटाने पर गर्व करते हुए, मैं आज सुबह उठा और जब मैंने अपनी तरफ देखा तो हैरान रह गया।/hi
काम की जगह पर एक खूबसूरत शादीशुदा औरत को जीतने पर गर्व महसूस करते हुए, मैं एक सुबह उठा और…
आधी रात को, मेरी हॉट पड़ोसन मेरे दरवाज़े पर दस्तक देकर अंदर आने के लिए कहने लगी, और जब मुझे उसकी हरकतों के पीछे का असली मकसद पता चला तो मैं हैरान रह गई…/hi
आधी रात को, मेरी हॉट पड़ोसन ने अंदर आने के लिए मेरा दरवाज़ा खटखटाया, और जब मुझे उसकी हरकतों के…
मेरे बेटे ने गांव वाला अपना घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में एक घर खरीदा। लेकिन फिर वह अपनी पत्नी के माता-पिता को अपने साथ रहने के लिए ले आया, जबकि वे मेरी पत्नी और मेरे साथ, जो गांव में रहते थे, ऐसा बर्ताव करते थे जैसे हमारा कोई वजूद ही न हो। गुस्से में, मैं बिना बताए डिनर के समय उनसे मिलने चला गया। मेरे बेटे ने जवाब दिया, “तुमने मुझे बताया क्यों नहीं कि तुम आ रही हो?” और उसके बाद मेरी बहू ने जो किया, उससे मैं हैरान रह गया।/hi
मेरे बेटे ने गांव में हमारा घर बेच दिया, अपने माता-पिता की सारी सेविंग्स—4 करोड़ रुपये—इकट्ठी कीं और शहर में…
End of content
No more pages to load






